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विवाह में रुकावट~ कारण और उपाय!! *आइए जानते हैं डॉक्टर संजय आर शास्त्री

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जन्मकुंडली में कुछ ऐसे योग होते है जो विवाह में अनावश्यक रुकावटें पैदा करते हैं।इसलिए समय रहते किसी अच्छे एस्ट्रोलॉजर से अपनी जन्मकुंडली दिखाकर इसका उपाय जरूर करनी चाहिए। आज हम ऐसे ही कुछ विशेष योगों के बारे में बताएंगे जो विवाह में अड़चने डालते है।
जन्मकुंडली के सप्तम भाव में बुध और शुक्र दोनों हो तो विवाह की बातें होती रहती हैं, लेकिन विवाह काफी समय के बाद होता है जबकि चौथा भाव या लग्न भाव में मंगल हो और सप्तम भाव में शनि हो तो व्यक्ति की रुचि शादी में नहीं होती है।
सप्तम भाव में शनि और गुरु हो या चंद्र से सप्तम में गुरु हो तो शादी देर से होती है।
इसी प्रकार चंद्र की राशि कर्क से गुरु सप्तम हो तो विवाह में बाधाएं आती हैं या सप्तम भाव में त्रिक भाव का स्वामी हो और कोई शुभ ग्रह योगकारक नही हो तो विवाह में व्यवधान होता है।
लग्न यानि प्रथम भाव, सप्तम भाव या बारहवें भाव में गुरु या कोई शुभ ग्रह योग कारक न हो और चंद्रमा कमजोर हो तो विवाह में निश्चित रूप से बाधाएं आती हैं।
लड़की की कुंडली में सप्तमेश या सप्तम भाव शनि से पीड़ित हो तो भी विवाह देर से होता है जबकि राहु की दशा में शादी हो या राहु सप्तम भाव को पीड़ित कर रहा हो तो शादी होकर टूट सकती है।लड़कियों के लिए 11मुखी और लड़कों के लिए 12 मुखी गौरीशंकर रुद्राक्ष धारण करने से आश्चर्य जनक रूप से लाभ होता है।अन्य उपायों में पुखराज रत्न पहनने की भी सलाह दी जाती है।
लेकिन सटीक उपाय कुंडली देखकर ही बताई जा सकती है।
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