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आपकी भी कुंडली में तो नहीं बन रहा शनि योग? जानिए इसका महत्व और फायदे *आइए जानते हैं एस्ट्रोलॉजर 11:11 आचार्य मिनी

जब भी कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है तो व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। शनि के राशि परिवर्तन करने पर भी कई तरह के योग बनते हैं

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जब भी कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है तो व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। शनि के राशि परिवर्तन करने पर भी कई तरह के योग बनते हैं जिसमें से एक शनि योग होता है वैदिक ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों के परिवर्तन से सभी जातकों के जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। सभी ग्रह एक नियमित अंतराल पर राशि परिवर्तन करते हैं जिस कारण से अलग-अलग तरह योग बनते हैं जिसका प्रभाव हर एक व्यक्ति पर जरूर पड़ता है। सभी ग्रहों में शनि सबसे धीमी चाल से चलने वाले ग्रह हैं। ज्योतिष में शनि ग्रह को न्याय और कर्म फल दाता माना गया है। शनिदेव हर किसी को उसके द्वारा किए गए कर्मों के आधार पर शुभ-अशुभ फल प्रदान करते हैं। जब भी कोई ग्रह अपनी राशि बदलता है तो व्यक्ति की कुंडली में ग्रह की स्थिति अलग-अलग होती है। शनि के राशि परिवर्तन करने पर भी कई तरह के योग बनते हैं जिसमें से एक शनि योग होता है। व्यक्ति की कुंडली में शनि योग बनने पर व्यक्ति का जीवन सुख,समृद्धि और ऐशोआराम से बीतता है। आइए जानते हैं कैसे बनता है कुंडली में शनि योग।कुंडली में शनि योग
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब शनि मकर, कुंभ और तुला राशि के मध्य में यानी केंद्र भाव में तो शनि का शश योग बनता है। इस योग से लग्न में मजबूती आती है। वहीं अगर किसी जातक की कुंडली में शनि पहले, चौथे, सप्तम और दसवें स्थान पर मकर और कुंभ राशि में स्थिति हो तो पंच महापुरुष योग बनता है। यह योग राजयोग की कैटेगरी में आता है।सप्तम भाव में शनि
वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि सातवें भाव में विराजमाम होते हैं तो सप्तमस्थ शनि योग बनने से शनि बहुत ही अच्छे फल प्रदान करते हैं। शनि के सप्तम भाव में होने से व्यक्ति को प्रसिद्धि मिलती है और व्यक्ति धनवान बनता है। लेकिन शनि के सातवें भाव में होने पर जातक के विवाह में देरी होती है। व्यक्ति मेहनत के बल पर ऊंचे मुकाम को हासिल करता है। हालांकि ऐसे व्यक्ति की किस्मत विवाह होने के बाद चमकती है। शनि-शुक्र शुभ योग का निर्माण
शनि न्याय और कर्म के स्वामी है जबकि शुक्र ग्रह सुख, वैभव, सौंदर्य और भोगविलासिता के स्वामी होते हैं। ऐसे में जब भी शनि और शुक्र ग्रह की युति होती है तब शुभ योग बनता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस तरह का योग तुला और वृषभ राशि के लिए सबसे उत्तम होता है। क्योंकि तुला राशि पर शनि ग्रह का स्वामित्व प्राप्त होता है और वृष राशि पर शुक्र ग्रह का। शनि-शुक्र के योग से व्यक्ति की जल्दी से किस्मत चमक जाती है और राजसी सुख, वैभव और धन-दौलत की प्राप्ति होती है।

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