भागवत कथा के सातवे दिन बुधवार को वृदांवन से पधारे परम पूज्य रवि कृष्णा जी महाराज कृष्ण-सुदामा मिलन की कथा सुनाई। श्रीमद भागवत कथा का विश्राम बरसान
भागवत कथा के सातवे दिन बुधवार को वृदांवन से पधारे परम पूज्य रवि कृष्णा जी महाराज कृष्ण-सुदामा मिलन की कथा सुनाई। श्रीमद भागवत कथा का विश्राम बरसाने की तर्ज पर फूलों की होली खेल कर किया गया। बृज के गीत और जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने राधा-कृष्ण पर पुष्प वर्षा की। एक-दूसरे पर भी पुष्प बरसाए।
परम पूज्य रवि कृष्णा जी महाराज ने बताया कि जगत में प्रेम का रिश्ता सबसे बड़ा रिश्ता होता है। प्रेम की डोर इतनी मजबूत होती है जिससे भगवान भी खिंचे चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है जब कि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है। सुदामा की मित्रता भगवान के साथ निःस्वार्थ थी उन्होंने कभी उनसे सुख साधन या आर्थिक लाभ प्राप्त करने की कामना नहीं की। लेकिन सुदामा की पत्नी द्वारा पोटली में भेजे गए चावलों में भगवान श्री कृष्ण से सारी हकीकत कह दी। प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को सबकुछ प्रदान कर दिया। कथा वाचक ने कहा कि जो वैष्णव होता है, परलोक में उसके साथ सत्संग अवश्य साथ जाता है। इसलिए जितना भी समय मिले सत्संग जरूर करना चाहिए। यही जीवन का मूलधन है।
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