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26 दिसंबर को है विनायक चतुर्थी, इर इच्छा पूरी करने के लिए ऐसे करें पूजा *आइए जानते हैं डॉक्टर संजय आर शास्त्री

पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है) इस बार 26 दिसंबर 2022 (सोमवार) को आ रही है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी

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पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है) इस बार 26 दिसंबर 2022 (सोमवार) को आ रही है। पौष माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी (जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है) इस बार 26 दिसंबर 2022 (सोमवार) को आ रही है। यह इस वर्ष की अंतिम चतुर्थी भी है। कई जगहों पर इसे वरद विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है। इस दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है, उनके निमित्त व्रत रखा जाता है। विभिन्न कर्मकांडों के जरिए उन्हें प्रसन्न कर उनका आशीर्वाद लिया जाता है। जानिए इस पर्व के बारे में विस्तृत जानकारी

विनायक चतुर्थी 2022 तिथि
चतुर्थी तिथि का आरंभ – 26 दिसंबर 2022 को सुबह 4.51 बजे
चतुर्थी तिथि का समापन – 27 दिसंबर 2022 की सुबह 1.37 बजे
सूर्योदय के अनुसार चतुर्थी तिथि 26 दिसंबर को ही मनाई जाएगी और इसी दिन व्रत भी रखा जाएगा। गणेश जी की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Vinayaka Chaturthi Puja Muhurat)
इस दिन कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं जिनमें आप पूजा कर सकते हैं।

ये मुहूर्त एवं योग निम्न प्रकार हैं-

सर्वार्थ सिद्धि योग – सुबह 7.12 बजे से सायं 4.42 बजे तक रहेगा।
रवि योग – सुबह 7.12 बजे से सायं 4.42 बजे तक रहेगा।
अभिजित मुहूर्त – दोपहर 12.01 बजे से 12.42 बजे तक रहेगा।
अमृत काल – सुबह 7.27 बजे से 8.52 बजे तक रहेगा। कैसे करें गणपति की पूजा (Ganesh Puja Vidhi)
ज्योतिषाचार्य रामदास के अनुसार विनायक चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा करने के लिए सुबह ब्रह्म मुहूर्त में ही स्नान कर साफ, स्वच्छ वस्त्र पहन कर तैयार हो जाएं। इसके बाद अपने घर के मंदिर में ही अथवा निकट के किसी मंदिर में जाकर गणेश जी का अभिषेक करें। उन्हें लाल चंदन से तिलक लगाएं, जनेऊ, वस्त्र, रोली, मोली, अक्षत, धूप, देसी घी का दीपक, पुष्प, माला आदि अर्पित करें। उनकी आरती करें और उन्हें मूंग या बेसन का लड्डू प्रसाद स्वरूप चढ़ाएं।

आरती के बाद उनके प्रसाद को सभी लोगों में वितरित करें। इस प्रकार गणपति की पूजा की जाती है। इस दिन यदि आप गरीबों को अथवा पशु-पक्षियों को भोजन भी करवा सकें तो यह अति उत्तम होगा। ऐसा करने से आपकी कई समस्याएं हल हो जाएंगी। साथ ही राहु और केतु का अशुभ प्रभाव भी दूर होगा।

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