हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार कुछ पेड़-पौधों में देवी देवताओं का वास होता है, जैसे केले के पेड़ में श्री हरी विष्णु, बेल के पेड़ में भगवान शिव। कई पौधे घर में सुख शांति और सकारात्मक ऊर्जा के लिए लगाए जाते हैं। ऐसा ही एक पेड़ है जिसका हिंदू धर्म में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान और कार्यों में विशेष महत्व है। इस पेड़ को पलाश या परसा के पेड़ के नाम सा जाना जाता है। ये दो प्रकार के होते हैं एक नारंगी और दूसरा सफेद।

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मान्यता है कि इस पेड़ में त्रिदेव का वास होता है। ज्योतिष शास्त्र में कई विशेष उपायों के लिए पलाश के फूल का उपयोग किया जाता है। धार्मिक उपायों के अलावा पलाश के फूलों का उपयोग आयुर्वेद में भी किया जाता है। आज के इस लेख में हम पलाश के महत्व एवं इसके उपयोग के बारे में बताएंगे

पलाश के पेड़ का महत्व

importance and uses of palash tree in hinduism

पलाश का अर्थ है पवित्र पत्तियां और हिंदू धर्म में इस पेड़ का महत्वपूर्ण स्थान है। हिंदू धर्म में धार्मिक अनुष्ठानों में पलाश के पत्ते, लकड़ी और फूलों का उपयोग किया जाता है। हिंदू मान्यता के अनुसार पलाश पेड़ की उत्पत्ति सोमरस में डूबे एक बाज के गिरे हुए पंख से हुई है। पलाश पेड़ को लेकर एक कथा प्रचलित है जिसमें माता पार्वती ने ब्रह्म देव को पलाश वृक्ष बनने का श्राप दिया था। इस पेड़ का धार्मिक महत्व इसके पत्तों के त्रिकोणीय गठन से शुरू होता है, जिसमें पत्ते के मध्य भाग में भगवान विष्णु, बाईं और ब्रह्मा जी और दाईं ओर महादेव का प्रतिनिधित्व करता है। शास्त्रों में पलाश के पेड़ को देवताओं का कोषाध्यक्ष कहा गया है। साथ ही इसे चंद्रमा का प्रतीक माना गया है। क्योंकि इसके फूल के मध्य भाग में चंद्रमा का खूबसूरत दृश्य दिखाई देता है।

भगवान शिव को बेहद प्रिय है सफेद पलाश

धार्मिक मान्यता है कि सफेद पलाश के फूल, पत्ते और छाल भगवान शिव को बेहद प्रिय है। इसके फूल का उपयोग न सिर्फ भगवान के श्रृंगार के लिए किया जाता है बल्कि, इसके पत्तों और फूलों से महाकाल का अभिषेक भी किया जाता है।

 

धार्मिक अनुष्ठानों में पलाश के पेड़ का उपयोग

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  • हिंदू यज्ञों में हवन में जलाने के लिए पलाश की सूखी टहनियों एवं लकड़ियों का उपयोग किया जाता है।
  • पलाश के पत्ते से बने दोना का उपयोग श्राद्ध कार्य के लिए किया जाता है।