किस आयु में आपकी राशि का स्वामी ग्रह करेगा भाग्योदय-आइए जानते हैं डॉ संजय आर शास्त्री


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में ग्रहों का गहरा असर होता है। जन्म से लेकर मृत्यु तक जीवन में नवग्रह की चाल का चक्र चलता है। ग्रहों के गोचर यानी राशि परिवर्तन से होने वाले शुभ-अशुभ प्रभाव से व्यक्ति का सूंपर्ण जीवन प्रभावित होता है। ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली के सभी 12 भावों में बना रहता है। इस प्रकार उसे शुभ-अशुभ फल की प्राप्ति होती है। प्रत्येक राशि का एक स्वामी ग्रह होता है। यह ग्रह एक निश्चित समय काल में जातक के जीवन में अपना प्रभाव दिखता है। इस क्रम में आज हम आपको बताएंगे कि कौन सा ग्रह कब अपना असर दिखाता है यानि उम्र के हर पड़ाव पर किस तरह ग्रह हमारा जीवन प्रभावित करते हैं। इतना नहीं ज्योतिष शास्त्र की मदद से ये भी पता लगाया जा सकता है कि ये ग्रह कब और कैसे अपना बुरा प्रभाव देते हैं।
कब कौन सा ग्रह दिखता है असर
1.सूर्य ग्रह- सिंह राशि में 22वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

2.चंद्र ग्रह- कर्क राशि में 24वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

3.मंगल ग्रह- मेष / वृश्चिक राशि में 28वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

4.शुक्र ग्रह- वृषभ /तुला राशि में 25वें वर्ष या विवाह के बाद अपना प्रभाव दिखाता है।

5.बुध ग्रह- मिथुन / कन्या राशि में 32वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

6.गुरु ग्रह- धनु / मीन राशि में 16वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

7.शनि ग्रह- मकर / कुम्भ राशि में 36वें वर्ष में अपना प्रभाव दिखाता है।

9.राहु-केतु- जिन भी जातको पर इन ग्रहों का प्रभाव हो तो क्रमश: 42वें व 44वें वर्ष में भाग्योदय होता है।

कब होगा आपका भाग्योदय ?
ज्योतिष के अनुसार जब बृहस्पति किसी जातक की कुंडली के भाग्य भाव यानी नवम भाव में विराजमान होता है तो यह स्थिति जातक के भाग्य को मात्र 16 वर्ष की आयु में ही चमका देती है। वहीं, सूर्य देव के नवम भाव में स्थित होने पर जातक का भाग्य 22 वर्ष की आयु में चमकता है। जब चंद्रमा नवम भाव में होता है तो 24 वर्ष की आयु में भाग्योदय होता है। जन्म कुंडली के नवम भाव में शुक्र की उपस्थिति का अर्थ है कि 25 वर्ष की आयु में भाग्य चमकेगा। नवम भाव में स्थित मंगल का अर्थ है कि 28 वर्ष की आयु में जातक के लिए सौभाग्य की संभावना बढ़ जाएगी। नवम भाव में स्थित बुध 32 वर्ष की आयु में अनुकूल भाग्य का संकेत देता है। शनि नवम भाव में स्थित हो तो 36 वर्ष की आयु में भाग्य लाता है। जबकि नवम भाव में छाया ग्रह राहु या केतु की उपस्थिति 42 वर्ष की आयु में व्यक्ति के लिए सौभाग्य की संभावना लेकर आती है।

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