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सनातन धर्म के चार वेदों में क्या है ये क्यों है इतने महत्वपूर्ण जानिए एस्ट्रोलॉजर11:11 आचार्य मिनी जी

सनातन धर्म में वेदों और पुराणों को बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र बताया गया है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वेद हिंदू धर्म और दुनिया का पहला धर्मग्रंथ है

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सनातन धर्म में वेदों और पुराणों को बेहद महत्वपूर्ण और पवित्र बताया गया है धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वेद हिंदू धर्म और दुनिया का पहला धर्मग्रंथ है जिसका सामान्य अर्थ ज्ञान से होता है वेद ज्ञान का भंडार माना जाता है इसमें कई रहस्यमयी बातों का भी वर्णन मिलता है
वेदों के ज्ञान को अगर मनुष्य प्राप्त कर लें तो उसकी पीढ़ी दर पीढ़ी का कल्याण हो जाता है इसमें देवता, ब्रह्मांड, ज्योतिष, औषधि, विज्ञान, भूगोल, धर्म, संगीत, रीति रिवाज आदि विषयों के बारे में बताया गया है वेद को इसलिए भी अहम माना जाता है क्योंकि इसे किसी मनुष्य द्वारा नहीं बल्कि ईश्वर द्वारा ऋषियों को सुने ज्ञान के आधार पर लिया गया है इसलिए वेद को श्रुति भी कहा जाता है तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा वेदों से जुड़ी अहम जानकारी प्रदान कर रहे हैं तो आइए जानते हैं।
आपको बता दें कि वेद कुल चार प्रकार के होते हैं जिसमें ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद शामिल है ऋग्वेद को सबसे पहला वेद माना जाता है इसमें पद्घात्मक हैं इसमें इंद्र, अग्नि, रुद्र, वरुण, मरुत, सवित्रु, सूर्य और दो अश्विनी देवताओं की स्तुति शामिल है इसमें 10 अध्याय में 1028 सूक्त में 11 हजार मंत्र है ऋग्वेद में करीब 125 ऐसी औषधियों के बारे में बताया गया है जो 107 स्थानों पर पाई जाती है, वही यजुर्वेद में अग्नि द्वारा देवताओं को दिए जाने वाले आहुति के बारे में बताया गया है इसमें यज्ञ की विधियां और मंत्रों के बारे में लिखा गया है यजुर्वेद में तत्वज्ञान के बारे में भी वर्णन मिलता है
वेद की दो शाखाएं है एक शुक्ल और दूसरा कृष्ण है। वही सामवेद गीत संगीत से जुड़ा है इसमें वर्णित श्लोकों को गीत के माध्यम से गया जाता है इसी कारण इस वेद का संगीत शास्त्र में भी अहम स्थान है इसमें सविता, अग्नि और इंद्र देवों का जिक्र मिलता है वही सनातन धर्म के चौथे वेद यानी अथर्ववेद में रहस्यमयी विद्धाओं, चमत्कार और आयुर्वेद का वर्णन किया गया है जो सांसारिक सुखों को प्राप्त करने का उपयोगी कर्मकांड माना जाता है इसमें बताया गया है कि व्यक्ति के रोगों को कैसे ठीक किया जाए।

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