
आपकी कुंडली का दूसरा घर धन का भाव है और इस भाव के स्वामी को धनेश कहते है। धनेश के लग्न में होने पर वह स्त्री या पुरुष खुद के ऊपर अधिक खर्च करता है।
यदि धनेश अपने ही घर यानि धन भाव में हो तो उस व्यक्ति का धन उसके कुटुंब, परिवार,मित्र,खाने पीने आदि के ऊपर अधिक खर्चा होता है।जबकि धनेश तृतीय भाव में हो तो जातक अपना धन अपने छोटे भाई बहनों,नौकर – चाकर पर खर्च करता है।
इसी प्रकार धनेश के चतुर्थ भाव में होने पर जातक अपना धन अपनी सुख सुविधा की चीजो को खरीदने में करता है और पंचम भाव में होने पर जातक का धन संतान, शिक्षा,कालेज, प्रेम आदि पर ज्यादा खर्च होता है।
यदि आपकी कुंडली में धनेश छठे स्थान में बैठा हो तो आप का धन ज्यादातर रोग, शत्रु, कर्ज आदि में खर्च होगा।धनेश के सप्तम भाव में होने पर जातक का धन पत्नी या रिलेशनशिप पर विशेष रूप से खर्च होता है।
जबकि धनेश के अष्टम में होने पर जातक का धन गुप्त विद्या सीखने पर खर्च होता है।
धनेश के नवम में होने पर जातक का धन धर्म, धार्मिक कार्य, मंदिर,साला,साली आदि पर खर्च होता है।
धनेश के दशम भाव यानि कर्म स्थान में होने पर व्यक्ति अपना स्टेटस अर्थात् धन, सम्मान, प्रतिष्ठा कमाने के लिए विशेष खर्च करता है।
धनेश लाभ स्थान में हो तो जातक का धन अपनी विभिन्न इच्छा पूर्ति, चाचा, बडे़ भाई बहन पर खर्च होता है।
धनेश के द्वादश भाव में होने पर जातक का धन अस्पताल, बीमारी, यात्रा,सांसरिक सुख पर खर्च होता है।
डॉक्टर एस आर शास्त्री
चेयरमैन सनातन धर्म मंदिर केंट वाशिंगटन एवम् वैदिक एस्ट्रो साइंस फाउंडेशन ऑफ़ अमेरिका
