
हिन्दू धर्म में पौष मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि पौष पूर्णिमा के दिन व्रत एवं लक्ष्मी-नारायण भगवान की पूजा का विधान है। पूर्णिमा तिथि के दिन चंदू देव की पूजा का भी विधान शास्त्रों में वर्णित है। इस वर्ष पौष मास में 6 जनवरी 2023 के दिन पौष पूर्णिमा है। मान्यता है कि इस दिन चंद्र देव अपने सभी मुख्य कलाओं से परिपूर्ण रहते हैं। पूर्णिमा तिथि के दिन पवित्र स्नान, दान और तप करने से व्यक्ति को लाभ मिलता है। रात्रि के समय महालक्ष्मी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन माता लक्ष्मी की पूजा करने से धन एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है और सभी पाप दूर हो जाते हैं। इस दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए शास्त्रों में कुछ मंत्रों को बताया गया है। जिन का शुद्ध उच्चारण करने से व्यक्ति को बहुत लाभ मिलता है। आइए जानते हैं-
महालक्ष्मी स्तोत्र
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शंखचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयंकरि ।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
सर्वज्ञे सर्ववरदे देवी सर्वदुष्टभयंकरि ।
सर्वदु:खहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि ।
मन्त्रपूते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।। आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्तिमहेश्वरि ।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते।।
स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्तिमहोदरे ।
महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणी ।
परमेशि जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
श्वेताम्बरधरे देवि नानालंकारभूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातर्महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते ।।
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं य: पठेद्भक्तिमान्नर: । सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ।।
एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम् ।
द्विकालं य: पठेन्नित्यं धन्यधान्यसमन्वित: ।।
त्रिकालं य: पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम् ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ।।
