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रंगभरी एकादशी क्यों मानी जाती है सुहाग के लिए वरदान? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व-आइए जानते हैं डॉ संजय आर शास्त्री

यूं तो एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन रंगभरी एकादशी इकलौती ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का अत्यंत महत्व। फ

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यूं तो एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन रंगभरी एकादशी इकलौती ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का अत्यंत महत्व।
फाल्गुन माह को रंगों का महीना कहा जाता है। इसी कारण से फाल्गुन माह में पड़ने वाली एकादशी तिथि को रंगभरी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस साल रंगभरी एकादशी 3 मार्च को मनाई जाएगी।
रंगभरी एकादशी को सुहाग की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यता है कि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है लेकिन यह एक मात्र ऐसी एकादशी है जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है।

ऐसे में ज्योतिष एक्सपर्ट डॉ संजय आर शास्त्री द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर आइये जानते हैं रंगभरी एकादशी के शुभ मुहूर्त, शुभ योग और महत्व के बारे में विस्तार से। साथ ही, रंगभरी एकादशी पर भद्रा काल के बारे में भी जानेंगे।
रंगभरी एकादशी की तिथि
पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि का शुभारंभ 2 मार्च दिन, गुरुवार (गुरुवार के उपाय) को सुबह 6 बजकर 39 मिनट से हो रहा है। तो वहीं, इसका समापन 3 मार्च, दिन शुक्रवार को सुबह 9 बजकर 11 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार रंगभरी एकादशी का व्रत 3 मार्च को रखा जाना है।
रंगभरी एकादशी का पूजा मुहूर्त
चूंकि इस एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विधान है। ऐसे में इस एकादशी का पूजा मुहूर्त भगवान शिव की नगरी काशी में शिव पूजन के हिसाब से तय होता है। लिहाजा इस दिन सुबह से ही भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा और उन्हें रंग, अबीर, गुलाल आदि लगाना शुरू होगा।

रंगभरी एकादशी का शुभ योग
रंगभरी एकादशी के दिन प्रातः काल से ही सौभाग्य योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे जिहें पूजा करने के साथ-साथ पूजा-पाठ (पूजा-पाठ के जरूरी नियम) एक फल के लिए भी सर्वोत्तम माना जाता है। इस दिन सौभाग्य योग सुबह से शाम 6 बजकर 45 मिनट तक और सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह से दोपहर के 3 बजकर 43 मिनट तक रहगा।

रंगभरी एकादशी पर भद्रा
रंगभरी एकादशी के दिन भद्रा समय दो बार लगेगा। रंगभरी एकादशी के दिन भद्रा काल सुबह 6 बजकर 45 मिनट से शुरू होगा और सुबह 9 बजकर 11 मिनट तक रहेगा जो धरती पर मान्य होगा वहीं, सुबह में 8 बजकर 58 मिनट तक भद्रा वास स्वर्ग में माना जाएगा। स्वर्ग में लगने से भद्रा अशुभ नहीं होगी।
रंगभरी एकादशी का महत्व
रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करने और उन्हें गुलाल आदि लगाने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। पति का स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है और वैवाहिक जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पति के साथ जीवन भरपूर प्यार के साथ बीतता है और संतान सुख भी प्राप्त होता है।

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