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माता रानी की होती है नवरात्रि फिर लक्ष्मी पूजन क्यों माना जाता है जरूरी-आइए जानते हैं डॉ संजय आर शास्त्री जी

चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान है लेकिन मान्यता है कि नवरात्रि की पूजा मां लक्ष्मी की पूजा के बिना अधूरी मानी जात

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चैत्र नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान है लेकिन मान्यता है कि नवरात्रि की पूजा मां लक्ष्मी की पूजा के बिना अधूरी मानी जाती है। आइये जानते हैं इसके पीछे का कारण। 

22 मार्च, दिन बुधवार से शुरू हुई चैत्र नवरात्रि का समापन 30 मार्च, दिन गुरुवार को होने जा रहा है। चैत्र नवरात्रि में माता रानी की पूजा का विशेष विधान होता है लेकिन पौराणिक मान्यता के अनुसार नवरात्रि की पूजा तब तक पूर्ण नहीं होती है जब तक लक्ष्मी पूजन न हो। ऐसे में ज्योतिष एक्सपर्ट डॉ संजय आर शास्त्री जी से आइये जानते हैं कि आखिर क्यों माता रानी की चैत्र नवरात्रि में लक्ष्मी पूजन माना जाता है अत्यंत महत्वपूर्ण और क्या है इसका लाभ।

  • चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। मां दुर्गा के नौ रूप अलग-अलग शक्तियों को दर्शाते हैं। देवी पुराण में इस बात का उल्लेख मिलता है कि मां दुर्गा के इन रूपों के पीछे संपन्नता को दर्शाने के लिए मां लक्ष्मी दिव्य तेज रूप में स्थापित रहती हैं।
  • यानी कि मां दुर्गा के नौ रूपों के पीछे मां लक्ष्मी के अष्ट रूप विराजमान हैं। यही कारण है कि नवरात्रि में मां लक्ष्मी की पूजा के बिना माता रानी की आराधना और नवरात्रि के व्रत निष्फल माने जाते हैं। मान्यता है कि मां दुर्गा के साथ मां लक्ष्मी की पूजा अक्षय फल प्रदान करती है।
  • मां शैलपुत्री के साथ आदि लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को जीवन में सुख, सौभाग्य और संपन्नता प्राप्त होती है। मां ब्रह्मचारिणी के साथ धन लक्ष्मी की पूजा करने से तपस्या, परोपकार और आध्यात्म के गुण जन्म लेते हैं और धन से व्यक्ति समृद्ध बना रहता है।
  • मां चंद्रघंटा के साथ गज लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में नकारात्मकता (नकारात्मक ऊर्जा हटाने के उपाय) का अंत होता है और उसे गज के समान तीव्र बुद्धि, विवेक और बल की प्राप्ति होती है। मां कूष्मांडा के साथ धान्य लक्ष्मी की पूजा करने से घर की उन्नति होती है और घर में अन्न के भंडार भरे रहते हैं।
  • मां स्कंदमाता के साथ संतान लक्ष्मी की पूजा करने से घर के बच्चों पर कभी कोई संकट नहीं आता है। संतान का कल्याण होता है और उसका भाग्य चमक उठता है। मां कात्यायनी के साथ विजया लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन के किसी भी कार्य में कभी कोई बाधा नहीं आती है।
  • मां कालरात्रि के साथ वीरा लक्ष्मी की पूजा करने से व्यक्ति को वीरता, अखंड विजय, भय पर जीत, शत्रुओं के विनाश आदि का वरदान मिलता है। मां महागौरी के साथ विद्या लक्ष्मी की पूजा करने से जीवन में तेज और व्यक्तित्व में सद्गुणों का संचार होता है।

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